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विजयादशमी पर जाने रावण के भाई विभीषण की अनसुनी बातें

विजयादशमी का त्यौहार हर साल बड़े ही धूम से मनाया जाता है. इस दिन को अधर्म पर धर्म की जीत के लिए मनाया जाता है यानि बुराई पर अच्छे की जीत के उपलक्ष में मनाया जाता है. इस दिन रावण का पुतला जलाया जाता है और इस दिन को त्यौहार के रूप में मनाते हैं. रावण के बारे में आप सभी जानते हैं, लेकिन उनके छोटे भाई विभीषण के बारे में कुछ जानकारी नहीं रखते लोग. आज हम उनके ही बारे में कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं.

बता दें, विभीषण विश्ववा के सबसे छोटे पुत्र थे . बचपन से ही उनके मन में धर्म के प्रति रुचि थी. वे श्रीराम के परम भक्त थे. यह तीन भाई थे विभीषण, कुंभकरण, रावण . विभीषण सबसे छोटे थे, ये दोनों भाइयों से अलग विभीषण का स्वभाव था और धर्म के मार्ग पर चलते थे. कथाओं में ये बताया गया है कि विभीषण लंका में रावण के साथ रहते थे. जब रावण ने सीता का हरण किया था तो विभीषण ने अपने भाई रावण को महापाप बताते हुए सीता को श्रीराम को लौट आने का कहा था मगर रावण ने अनसुना किया और इस महापाप का भागी बन गया.

जब श्री हनुमान सीता माता की खोज करते हुए आए तो उन्होंने राम नाम के अंकित विभीषण का घर देखा ,चारों और तुलसी के पेड़ लगे हुए देखें, इतना ही नहीं, सूर्योदय के पूर्व का समय था और उसी समय श्री राम नाम का सुमिरन करते हुए विभीषण की निद्रा भंग हुई . विभीषण ने ही हनुमान को माता सीता का पता दिया था. उन्होंने श्री हनुमान को अशोक वाटिका में सीता माता का पता दिया.

कथाओं में ये भी विख्यात है कि विभीषण का एक गुप्तचर था इसका नाम ‘अनल ‘ था. उसने रावण के बारे में सब पता करके श्रीराम को जानकारी दी. इसी प्रकार श्री राम ने रावण को मार कर विजय हासिल की थी और माता सीता को छुड़ाया था. इसी के कारण आज भी विभीषण के लिए कहा जाता है ‘घर का भेदी लंका ढाए ‘. जिसे आपने कई बार सुना ही होगा यानि जो अपने घर के भेद को दूसरों को बता दें.

 

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Shivakanya

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